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श्लोक  7.117.4 
तैर्ललाटार्पितेर्बाणैर्युयुधानस्त्वजिह्मगै:।
व्यरोचत महाराज त्रिशृङ्ग इव पर्वत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन सीधे बाणों को अपने माथे में लगाकर युयुधान तीन शिखरों वाले पर्वत के समान शोभायमान हो गया।
 
Maharaj! With those straight arrows stuck in his forehead, Yuyudhan became as beautiful as a mountain with three peaks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)