Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.117.34: द्रोणाचार्य पुनः सेना के द्वार पर जाकर खड़े हो गये। उनके घोड़े, जो सात्यकि के बाणों से घायल होकर वायु के समान वेग से दौड़ रहे थे, उन्हें वहाँ ले आये। | mahabharat अध्याय 7.117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणाचार्य पुनः सेना के द्वार पर जाकर खड़े हो गये। उनके घोड़े, जो सात्यकि के बाणों से घायल होकर वायु के समान वेग से दौड़ रहे थे, उन्हें वहाँ ले आये।
Dronacharya once again went and stood at the gate of the formation. His horses, which were running as fast as the wind after being struck by Satyaki's arrows, brought him there. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥