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mahabharat 7.117.29: युयुधान ने एक ही बाण से द्रोणाचार्य के सारथि को भूमि पर गिरा दिया तथा अपने बाणों से सारथिहीन घोड़ों को चारों दिशाओं में उड़ा दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.117.29 
ततो द्रोणस्य यन्तारं निपात्यैकेषुणा भुवि।
अश्वान् व्यद्रावयद् बाणैर्हतसूतांस्ततस्तत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
युयुधान ने एक ही बाण से द्रोणाचार्य के सारथि को भूमि पर गिरा दिया तथा अपने बाणों से सारथिहीन घोड़ों को चारों दिशाओं में उड़ा दिया।
 
With a single arrow Yuyudhaana threw Dronacharya's charioteer to the ground and with his arrows he sent the charioteer-less horses flying in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)