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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.117.16 
सात्यकिस्तु तत: क्रुद्धो धनुस्त्यक्त्वा महारथ:।
गदां जग्राह महतीं भारद्वाजाय चाक्षिपत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इससे महारथी सात्यकि अत्यन्त क्रोधित हो गये और उन्होंने अपना धनुष त्यागकर एक विशाल गदा हाथ में ली और उससे द्रोणाचार्य पर आक्रमण कर दिया।
 
This made the great warrior Satyaki very angry. He abandoned his bow and took a huge mace in his hand and attacked Dronacharya with it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)