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mahabharat 7.117.10: इसी प्रकार युयुधान के छोड़े हुए लाखों रक्तपिपासु बाण द्रोणाचार्य के रथ पर बरसने लगे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 117: सात्यकि और द्रोणाचार्यका युद्ध, द्रोणकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.117.10 
तथैव युयुधानेन सृष्टा: शतसहस्रश:।
अवाकिरन् द्रोणरथं शरा रुधिरभोजना:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार युयुधान के छोड़े हुए लाखों रक्तपिपासु बाण द्रोणाचार्य के रथ पर बरसने लगे॥10॥
 
Similarly, lakhs of bloodthirsty arrows fired by Yuyudhaan started raining on Dronacharya's chariot. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)