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mahabharat 7.116.6: आपके पराक्रमी पुत्रों द्वारा सब ओर से घायल होकर वृष्णिवंशी वीर सात्यकि ने अपने बाणों से उन सबको अलग-अलग बींधकर उनसे बदला लिया॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.116.6 
सर्वत: प्रतिविद्धस्तु तव पुत्रैर्महारथै:।
तान् प्रत्यविध्यद् वार्ष्णेय: पृथक् पृथगजिह्मगै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आपके पराक्रमी पुत्रों द्वारा सब ओर से घायल होकर वृष्णिवंशी वीर सात्यकि ने अपने बाणों से उन सबको अलग-अलग बींधकर उनसे बदला लिया॥6॥
 
Being injured from all sides by your mighty sons, the brave Satyaki of Vrishni took revenge by piercing them all separately with his arrows. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)