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mahabharat 7.116.39-40: सात्यकि का बाण यम की गदा के समान भयंकर था। उसने कृतवर्मा के स्वर्ण कवच को चकनाचूर कर दिया और उसे गहरी चोट पहुँचाई। वह रक्त से लथपथ होकर धरती में धँस गया।   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  7.116.39-40 
सोऽविध्यत् कृतवर्माणं यमदण्डोपम: शर:॥ ३९॥
जाम्बूनदविचित्रं च वर्म निर्भिद्य भानुमत्।
अभ्यगाद् धरणीमुग्रो रुधिरेण समुक्षित:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि का बाण यम की गदा के समान भयंकर था। उसने कृतवर्मा के स्वर्ण कवच को चकनाचूर कर दिया और उसे गहरी चोट पहुँचाई। वह रक्त से लथपथ होकर धरती में धँस गया।
 
Satyaki's arrow was as dreadful as Yama's mace. It shattered Kritavarma's golden armour and wounded him deeply. It sank into the ground soaked in blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)