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mahabharat 7.116.31-32h: तत्पश्चात् वे दोनों श्रेष्ठ पुरुष प्रज्वलित अग्नि और वेगवान व्याघ्रों के समान अत्यन्त क्रोधित होकर आपस में लड़ने लगे। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.116.31-32h 
तत: परमसंक्रुद्धौ ज्वलिताविव पावकौ॥ ३१॥
समेयातां नरव्याघ्रौ व्याघ्राविव तरस्विनौ।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे दोनों श्रेष्ठ पुरुष प्रज्वलित अग्नि और वेगवान व्याघ्रों के समान अत्यन्त क्रोधित होकर आपस में लड़ने लगे। 31 1/2॥
 
After that, both the best of men, like blazing fire and swift tigers, became extremely angry and fought with each other. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)