श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.116.30-31h 
तत: प्रजविताश्वेन विधिवत् कल्पितेन च॥ ३०॥
आससाद रणे भोजं प्रतिमानं धनुष्मताम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सात्यकि शीघ्रगामी घोड़ों से जुते हुए तथा उचित रीति से सुसज्जित रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में धनुर्धरों के आदर्श कृतवर्मा के पास पहुँचे ॥30 1/2॥
 
Thereafter, Satyaki reached Kritavarma, the ideal of archers, in the battlefield in a chariot drawn by swift horses decorated in proper manner. 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)