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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.116.3 
विकर्णश्चापि निशितैस्त्रिंशद्भि: कङ्कपत्रिभि:।
विव्याध सव्ये पार्श्वे तु स्तनाभ्यामन्तरे तथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विकर्ण ने भी काँटेदार पंख वाले तीस तीखे बाणों से सात्यकि की बायीं पसली और छाती को छेद डाला।
 
Thereafter Vikarna also pierced Satyaki's left rib and chest with thirty sharp arrows having thorny wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)