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mahabharat 7.116.27-28h: वह अपने उत्तम धनुष को हिलाते हुए, घोड़ों को हाँकते हुए, सारथि को डाँटते हुए वहाँ आया और बोला, "आगे बढ़ो, और तेज चलो!" 27 1/2।   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.116.27-28h 
विधुन्वानो धनु: श्रेष्ठं चोदयंश्चैव वाजिन:॥ २७॥
भर्त्सयन् सारथिं चाग्रे याहि याहीति सत्वरम्।
 
 
अनुवाद
वह अपने उत्तम धनुष को हिलाते हुए, घोड़ों को हाँकते हुए, सारथि को डाँटते हुए वहाँ आया और बोला, "आगे बढ़ो, और तेज चलो!" 27 1/2।
 
He came there shaking his excellent bow, driving the horses and reprimanding the charioteer, saying, "Proceed, go faster!" 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)