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mahabharat 7.116.13: सात्यकि के बाणों से घायल होकर आपका पुत्र दुर्योधन स्वर्ण मुकुट धारण किए हुए ऊँचे वृक्ष के समान सुशोभित हो रहा था ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.116.13 
सात्वतेन च बाणौघैर्निर्विद्धस्तनयस्तव।
शातकुम्भमयापीडो बभौ यूप इवोच्छ्रित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि के बाणों से घायल होकर आपका पुत्र दुर्योधन स्वर्ण मुकुट धारण किए हुए ऊँचे वृक्ष के समान सुशोभित हो रहा था ॥13॥
 
Wounded by Satyaki's arrows, your son Duryodhana was adorned like a tall tree wearing a golden crown. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)