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mahabharat 7.116.11: वे दोनों महारथी योद्धा रणभूमि में एक-दूसरे पर बाण चलाते और तीखे बाणों से एक-दूसरे पर आक्रमण करते हुए एक-दूसरे को अदृश्य कर रहे थे ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 116: सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुन: पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.116.11 
विमुञ्चन्तौ शरांस्तीक्ष्णान् संदधानौ च सायकान्।
अदृश्यं समरेऽन्योन्यं चक्रतुस्तौ महारथौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों महारथी योद्धा रणभूमि में एक-दूसरे पर बाण चलाते और तीखे बाणों से एक-दूसरे पर आक्रमण करते हुए एक-दूसरे को अदृश्य कर रहे थे ॥11॥
 
Those two mighty warriors, aiming their arrows at each other in the battle-field and attacking each other with sharp shafts, made each other invisible. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)