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mahabharat 7.115.61: राजन! तत्पश्चात् उस रणभूमि में कौरवों, द्रोणाचार्य और सात्यकि के मध्य हुए युद्ध के समान भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.115.61 
तत: प्रववृते युद्धं कुरूणां सात्वतस्य च।
द्रोणस्य च रणे राजन् घोरं देवासुरोपमम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् उस रणभूमि में कौरवों, द्रोणाचार्य और सात्यकि के मध्य हुए युद्ध के समान भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया।
 
King! Then a fierce battle like the war between the Kauravas, Dronacharya and Satyakika started on that battlefield. 61.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे जलसंधवधो नाम पञ्चदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिके कौरव-सेनामें प्रवेशके अवसरपर जलसंधका वध नामक एक सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११५॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६२ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)