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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध
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श्लोक 6
श्लोक
7.115.6
एवमुक्ते तु वचने सूतस्तस्य महामते।
निमेषान्तरमात्रेण कृतवर्माणमभ्ययात्॥ ६॥
अनुवाद
हे महात्मन! सात्यकि की यह बात सुनकर सारथि पलक झपकते ही रथ लेकर कृतवर्मा के पास पहुँच गया।
O great man! Upon hearing Satyaki say this, the charioteer reached Kritavarma with the chariot in the blink of an eye.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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