श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.115.52-53h 
तत: सुदंष्ट्रं सुमहच्चारुकुण्डलमण्डितम्॥ ५२॥
क्षुरेणास्य तृतीयेन शिरश्चिच्छेद सात्यकि:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तीसरे छुरे से सात्यकि ने उसके सुन्दर दाँतों से युक्त विशाल, सुन्दर कुंडलित सिर को काट डाला ॥52 1/2॥
 
Thereafter, with the third knife, Satyaki cut off his huge, beautifully coiled head with beautiful teeth. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)