श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 115: सात्यकिके द्वारा कृतवर्माकी पराजय, त्रिगर्तोंकी गजसेनाका संहार और जलसंधका वध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.115.5 
कुरुते कदनं पश्य पाण्डुसैन्ये ह्यमर्षित:।
एनं जित्वा पुन: सूत यास्यामि विजयं प्रति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
देखो, वह क्रोध में आकर पाण्डव सेना में उत्पात मचा रहा है। सारथि! उसे परास्त करके मैं अर्जुन के पास लौट जाऊँगा।॥5॥
 
Look, he is wreaking havoc in the Pandava army in anger. Charioteer! After defeating him I will go back to Arjuna.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)