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mahabharat 7.114.93: वे दोनों महाबली योद्धा अपने तीखे बाणों से एक-दूसरे को पीड़ा पहुँचाते हुए प्रलयकाल के दो सूर्यों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  7.114.93 
तापयन्तौ शरैस्तीक्ष्णैरन्योन्यं तौ महारथौ।
युगान्तप्रतिमौ वीरौ रेजतुर्भास्कराविव॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों महाबली योद्धा अपने तीखे बाणों से एक-दूसरे को पीड़ा पहुँचाते हुए प्रलयकाल के दो सूर्यों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Both those mighty warriors, tormenting each other with their sharp arrows, looked like the two suns of the time of doomsday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)