Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.92: जैसे दो सूर्य अपनी-अपनी किरणें अलग-अलग फैलाते हैं, उसी प्रकार उन दोनों वीरों ने अपने-अपने उत्तम धनुष उठाकर उन पर सैकड़ों बाण छोड़े। | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विधुन्वानौ धनु:श्रेष्ठे संदधानौ च सायकान्।
विसृजन्तौ च शतशो गभस्तीनिव भास्वरौ॥ ९२॥
अनुवाद
जैसे दो सूर्य अपनी-अपनी किरणें अलग-अलग फैलाते हैं, उसी प्रकार उन दोनों वीरों ने अपने-अपने उत्तम धनुष उठाकर उन पर सैकड़ों बाण छोड़े।
Just as two suns spread their rays separately, in the same way both those brave men brandished their excellent bows and shot hundreds of arrows at them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥