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mahabharat 7.114.91: वे दोनों वीर, प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी और शत्रुओं को दबाते हुए, दो दानवों के समान अपने बाणों के समूहों द्वारा एक दूसरे पर आक्रमण करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  7.114.91 
तौ दिशां गजसंकाशौ ज्वलिताविव पावकौ।
समापेततुरन्योन्यं शरसङ्घैररिंदमौ॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों वीर, प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी और शत्रुओं को दबाते हुए, दो दानवों के समान अपने बाणों के समूहों द्वारा एक दूसरे पर आक्रमण करने लगे।
 
Those two heroes, radiant like blazing fires and subduing their enemies, attacked each other like two giants with their groups of arrows. 91.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)