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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  7.114.88 
धनुरन्यत् समादाय शिखण्डी तु महायशा:।
अवारयन् कूर्मनखैराशुगैर्हृदिकात्मजम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली शिखण्डी ने भी दूसरा धनुष लेकर कछुओं के नखों के समान तीक्ष्ण बाणों द्वारा कृतवर्मा का सामना किया ॥88॥
 
After that, the great Shikhandi also took another bow and faced Kritavarma with arrows as sharp as the nails of tortoises. 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)