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mahabharat 7.114.83: अपनी विशाल स्वर्ण-जटित ढाल को घुमाते हुए उसने तलवार से कृतवर्मा के रथ पर प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  7.114.83 
भ्रामयित्वा महच्चर्म चामीकरविभूषितम्।
तमसिं प्रेषयामास कृतवर्मरथं प्रति॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
अपनी विशाल स्वर्ण-जटित ढाल को घुमाते हुए उसने तलवार से कृतवर्मा के रथ पर प्रहार किया।
 
Swinging his huge shield adorned with gold, he struck Kritavarma's chariot with the sword. 83
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)