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mahabharat 7.114.82: धनुष कट जाने पर शिखण्डी तुरन्त क्रोधित हो गया और सौ चन्द्रमाओं के चिन्ह वाली चमकती हुई ढाल और तलवार लेकर उस रणभूमि में आ गया।82।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  7.114.82 
शिखण्डी तु तत: क्रुद्धश्छिन्ने धनुषि सत्वर:।
असिं जग्राह समरे शतचन्द्रं च भास्वरम्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
धनुष कट जाने पर शिखण्डी तुरन्त क्रोधित हो गया और सौ चन्द्रमाओं के चिन्ह वाली चमकती हुई ढाल और तलवार लेकर उस रणभूमि में आ गया।82।
 
When his bow was cut, Shikhandi immediately became enraged and took up the shining shield and sword bearing the mark of a hundred moons on that battlefield. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)