श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 80-81
 
 
श्लोक  7.114.80-81 
तेऽपि तं प्रत्यविध्यन्त सप्तभि: सप्तभि: शरै:॥ ८०॥
शिखण्डिनस्तत: क्रुद्ध: क्षुरप्रेण महारथ:।
धनुश्चिच्छेद समरे प्रहसन्निव सात्वत:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
तब उन महारथियों ने भी कृतवर्मा पर सात-सात बाण चलाये। उस समय क्रोध में भरे हुए महारथी कृतवर्मा ने युद्धस्थल में हँसते हुए शिखण्डी के धनुष को छुरे से काट डाला।
 
Then those great warriors also shot seven arrows each at Kritavarma. At that time, the great warrior Kritavarma, filled with anger, smilingly cut off Shikhandi's bow with a razor in the battlefield. 80-81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)