Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.114.79-80h: तत्पश्चात् उस महाधनुर्धर ने क्रोधपूर्वक हंसते हुए भीमसेन को तीन बाणों से अत्यन्त घायल कर दिया तथा युद्ध में विजय के लिए प्रयत्नशील समस्त महारथियों को भी तीन-तीन बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  7.114.79-80h 
तत: क्रुद्धस्त्रिभिर्बाणैर्भीमसेनं हसन्निव।
अभिहत्य दृढं युद्धे तान् सर्वान् प्रत्यविध्यत॥ ७९॥
त्रिभिस्त्रिभिर्महेष्वासो यतमानान् महारथान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महाधनुर्धर ने क्रोधपूर्वक हंसते हुए भीमसेन को तीन बाणों से अत्यन्त घायल कर दिया तथा युद्ध में विजय के लिए प्रयत्नशील समस्त महारथियों को भी तीन-तीन बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter that great archer, laughing in anger, wounded Bhimasena deeply with three arrows and pierced all those mighty car-warriors, who were striving for victory in the battle, with three arrows each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)