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mahabharat 7.114.74-75h: राजन! वह स्वर्ण से विभूषित शक्ति सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करती हुई कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ी, मानो आकाश से कोई विशाल उल्का गिर रही हो।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  7.114.74-75h 
सा छिन्ना पतिता भूमौ शक्ति: कनकभूषणा॥ ७४॥
द्योतयन्ती दिशो राजन् महोल्केव नभश्च्युता।
 
 
अनुवाद
राजन! वह स्वर्ण से विभूषित शक्ति सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करती हुई कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ी, मानो आकाश से कोई विशाल उल्का गिर रही हो।
 
King! Illuminating all directions, that golden-adorned Shakti was cut and fell on the earth like a huge meteor falling from the sky. 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)