Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.114.73-74h: उस समय प्रलयकाल की अग्नि के समान अपनी ओर आती हुई उस शक्ति को कृतवर्मा ने सहसा दो बाणों से मारकर दो भागों में विभक्त कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  7.114.73-74h 
तामापतन्तीं सहसा युगान्ताग्निसमप्रभाम्॥ ७३॥
द्वाभ्यां शराभ्यां हार्दिक्यो निजघान द्विधा तदा।
 
 
अनुवाद
उस समय प्रलयकाल की अग्नि के समान अपनी ओर आती हुई उस शक्ति को कृतवर्मा ने सहसा दो बाणों से मारकर दो भागों में विभक्त कर दिया।
 
At that time that Shakti, who was like the fire of doomsday coming towards him, was suddenly hit by two arrows by Kritavarman and broke it into two parts. 73 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)