श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.114.67 
अथैनं छिन्नधन्वानं त्वरमाणो महारथ:।
आजघानोरसि क्रुद्ध: सप्तत्या निशितै: शरै:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन का धनुष कट जाने पर महारथी कृतवर्मा क्रोधित हो उठे और उन्होंने बड़ी शीघ्रता से उनकी छाती में सत्तर तीखे बाणों से गहरी चोट पहुंचाई।
 
When Bhimasena's bow was cut, the great warrior Kritavarman became enraged and in great haste struck him deeply in the chest with seventy sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)