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mahabharat 7.114.59: जिस प्रकार क्षुब्ध सागर का किनारा उसकी बढ़ती हुई सेना को रोक देता है, उसी प्रकार कृतवर्मा ने युद्धभूमि में पाण्डव सेना को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  7.114.59 
यथोद्‍वृत्तं वारयते वेला वै सलिलार्णवम्।
पाण्डुसैन्यं तथा संख्ये हार्दिक्य: समवारयत्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार क्षुब्ध सागर का किनारा उसकी बढ़ती हुई सेना को रोक देता है, उसी प्रकार कृतवर्मा ने युद्धभूमि में पाण्डव सेना को रोक दिया।
 
Just as the shore of an agitated ocean stops the advance of its advance, similarly Kritavarman stopped the Pandava army on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)