श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.114.55 
न हि ते सुकृतं किंचिदादौ मध्ये च भारत।
दृश्यते पृष्ठतश्चैव त्वन्मूलो हि पराजय:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
भरत! मैं भविष्य में, भविष्य में अथवा मध्यकाल में भी तुम्हारा कोई शुभ कर्म नहीं देखता। तुम ही इस पराजय के मूल कारण हो॥55॥
 
Bharat! I do not see any good deed of yours in the future, future or in the middle. You are the root cause of this defeat. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)