Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.114.50: राजन! दशार्हनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने पहले आपसे शांति की प्रार्थना की थी; किन्तु उन महान् एवं यशस्वी श्रीकृष्ण की वह इच्छा आपने पूरी नहीं की॥50॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.114.50 
याचितोऽसि पुरा राजन् दाशार्हेण शमं प्रति।
न च तं लब्धवान् कामं त्वत्त: कृष्णो महायशा:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
राजन! दशार्हनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने पहले आपसे शांति की प्रार्थना की थी; किन्तु उन महान् एवं यशस्वी श्रीकृष्ण की वह इच्छा आपने पूरी नहीं की॥50॥
 
Rajan! Dasharhanandan Lord Shri Krishna had earlier requested you for peace; But that wish of that great and famous Shri Krishna was not fulfilled by you. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)