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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.114.48 
पुरा यदुच्यसे प्राज्ञै: सुहृद्भिर्विदुरादिभि:।
मा हार्षी: पाण्डवान् राजन्निति तन्न त्वया श्रुतम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इससे पहले जब विदुर आदि बुद्धिमान मित्रों ने आपसे कहा था कि हे राजन, पाण्डवों का राज्य मत छीनो, तब भी आपने उनकी बात नहीं मानी।
 
Earlier when your intelligent friends like Vidura had told you that O King, do not usurp the kingdom of the Pandavas, you did not listen to them. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)