श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.114.47 
संजय उवाच
आत्मापराधात् सम्भूतं व्यसनं भरतर्षभ।
प्राप्य प्राकृतवद् वीर न त्वं शोचितुमर्हसि॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "भरतश्रेष्ठ! यह सब विपत्ति तुम्हारे अपने पापों के कारण ही आई है। वीर! इसे पाकर तुम नीच मनुष्यों की तरह शोक मत करो।
 
Sanjaya said, "Best of the Bharatas! All this trouble has befallen you because of your own sins. Brave one! After getting this, do not grieve like the low-class men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)