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mahabharat 7.114.45-46: संजय! भारद्वाजपुत्र महाबली अश्वत्थामा भी पांचालों से घोर शत्रुता रखता था। सिंधुराज जयद्रथ के वध के लिए अर्जुन ने जो उपाय किए थे, वे सब मुझे बताओ, क्योंकि तुम कथावाचन में कुशल हो।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  7.114.45-46 
भारद्वाजसुतस्तेषु दृढवैरो महारथ:॥ ४५॥
अर्जुनश्चापि यच्चक्रे सिन्धुराजवधं प्रति।
तन्मे सर्वं समाचक्ष्व कुशलो ह्यसि संजय॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
संजय! भारद्वाजपुत्र महाबली अश्वत्थामा भी पांचालों से घोर शत्रुता रखता था। सिंधुराज जयद्रथ के वध के लिए अर्जुन ने जो उपाय किए थे, वे सब मुझे बताओ, क्योंकि तुम कथावाचन में कुशल हो।
 
Sanjay! Bharadwaj's son, the mighty warrior Ashwatthama, was also deeply hostile towards the Panchalas. Tell me all the measures that Arjun adopted to kill Sindhuraj Jayadratha, because you are skilled in narrating stories.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)