श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.114.39 
पत्तिसंघान् रणे दृष्ट्वा धावमानांश्च सर्वश:।
निराशा विजये सर्वे मन्ये शोचन्ति पुत्रका:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में चारों ओर दौड़ती हुई पैदल सेना को देखकर मैं सोचता हूँ कि मेरे सभी पुत्र विजय से निराश होकर शोक कर रहे होंगे ॥39॥
 
Seeing the infantry running all over the battle-field, I imagine that all my sons must be mourning, despairing of victory. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)