vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय
»
श्लोक 34
श्लोक
7.114.34
शून्यान् कृतान् रथोपस्थान् सात्वतेनार्जुनेन च।
हतांश्च योधान् संदृश्य मन्ये शोचन्ति पुत्रका:॥ ३४॥
अनुवाद
मैं सोचता हूँ कि मेरे पुत्र यह देखकर बहुत दुःखी होंगे कि सात्यकि और अर्जुन ने हमारे रथों के आसन खाली कर दिए हैं और योद्धाओं को मार डाला है ॥ 34॥
I think my sons must be very sad to see that Satyaki and Arjuna have made the seats of our chariots empty and have killed the warriors. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×