Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.33: मेरे मन में ऐसा आ रहा है कि मेरे पुत्र अपने सारथिओं को भागते हुए देखकर शोक कर रहे होंगे, शत्रुओं को परास्त करने का उत्साह खो रहे होंगे और भागकर वीरता दिखा रहे होंगे ॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे मन में ऐसा आ रहा है कि मेरे पुत्र अपने सारथिओं को भागते हुए देखकर शोक कर रहे होंगे, शत्रुओं को परास्त करने का उत्साह खो रहे होंगे और भागकर वीरता दिखा रहे होंगे ॥ 33॥
It comes to my mind that my sons must be mourning seeing their charioteers fleeing, losing enthusiasm for defeating the enemy and showing bravery in running away. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥