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mahabharat 7.114.31: मैं समझता हूँ कि दशार्हनन्दन भगवान श्रीकृष्ण और शिनिप्रवर सात्यकि को अर्जुन के लिए रथ पर बैठे देखकर मेरा पुत्र दुःखी हुआ होगा॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.114.31 
दृष्ट्वा कृष्णं तु दाशार्हमर्जुनार्थे व्यवस्थितम्।
शिनीनामृषभं चैव मन्ये शोचन्ति पुत्रका:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मैं समझता हूँ कि दशार्हनन्दन भगवान श्रीकृष्ण और शिनिप्रवर सात्यकि को अर्जुन के लिए रथ पर बैठे देखकर मेरा पुत्र दुःखी हुआ होगा॥31॥
 
I understand that my son must have been saddened to see Dasharhanandan Lord Shri Krishna and Shinipravar Satyaki sitting on the chariot for Arjun. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)