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mahabharat 7.114.30: जब रथियों में श्रेष्ठ सात्यकि और अर्जुन समस्त अस्त्र-शस्त्रों की पहुँच से परे मेरी सेना में घुस आए, तब उन्हें युद्धभूमि में देखकर मेरे पुत्रों ने किस प्रकार धैर्य धारण किया?॥30॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.114.30 
सर्वशस्त्रातिगौ सेनां प्रविष्टौ रथिसत्तमौ।
दृष्ट्वा कां वै धृतिं युद्धे प्रत्यपद्यन्त मामका:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब रथियों में श्रेष्ठ सात्यकि और अर्जुन समस्त अस्त्र-शस्त्रों की पहुँच से परे मेरी सेना में घुस आए, तब उन्हें युद्धभूमि में देखकर मेरे पुत्रों ने किस प्रकार धैर्य धारण किया?॥30॥
 
When Satyaki and Arjuna, the best of charioteers, entered my army, beyond the reach of all weapons, how did my sons maintain their patience on seeing them on the battlefield?॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)