श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.114.29 
सात्यकिं च रणे दृष्ट्वा प्रविशन्तमभीतवत्।
किं नु दुर्योधन: कृत्यं प्राप्तकालममन्यत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि को निर्भय होकर युद्धभूमि में प्रवेश करते देख दुर्योधन ने उस समय कौन-सा कर्तव्य उचित समझा?॥29॥
 
Seeing Satyaki entering the battle-field fearlessly, what duty did Duryodhana consider appropriate at that time?॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)