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mahabharat 7.114.28: युद्धस्थल में राजा सिन्धु के सामने अर्जुन को खड़ा देखकर मेरा पुत्र अत्यंत मोहित हो गया, उसने कौन-सा कर्तव्य निश्चित किया? 28॥   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.114.28 
अर्जुनं समरे दृष्ट्वा सैन्धवस्याग्रत: स्थितम्।
पुत्रो मम भृशं मूढ: किं कार्यं प्रत्यपद्यत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में राजा सिन्धु के सामने अर्जुन को खड़ा देखकर मेरा पुत्र अत्यंत मोहित हो गया, उसने कौन-सा कर्तव्य निश्चित किया? 28॥
 
Seeing Arjuna standing in front of King Sindhu in the battle arena, my son became extremely enthralled, what duty did he decide? 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)