ते च प्राप्यैव संग्रामे निर्जिता: सव्यसाचिना।
शैनेयेन परामृष्टा: किमन्यद् भागधेयत:॥ २६॥
अनुवाद
परन्तु वीर अर्जुन ने युद्धभूमि में पहुँचते ही उन सबको परास्त कर दिया और सात्यकि ने भी उन्हें कुचल दिया। इसे भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है?॥26॥
However, Arjuna, the brave warrior, defeated them all as soon as he reached the battlefield and Satyaki also crushed them. What else can this be called except fate?॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)