श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.114.23 
असत्कारभृतस्तात मम सैन्ये न विद्यते।
कर्मणा ह्यनुरूपेण लभ्यते भक्तवेतनम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पिता जी! मेरी सेना में ऐसा कोई नहीं है जिसे अनादरपूर्वक रखा जाए। सबको अपने-अपने काम के अनुसार भोजन और वेतन मिलता है॥ 23॥
 
Father! There is no one in my army who is kept with disrespect. Everyone gets food and salary according to their work.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)