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mahabharat 7.114.20: हे भाई! मैं युद्धभूमि में एकत्र हुए कौरवों को मृत्यु का ग्रास मानता हूँ, क्योंकि युद्धभूमि में उनका पराक्रम पहले जैसा प्रबल नहीं रहा।   |   mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.114.20 
ग्रस्तान् हि कौरवान् मन्ये मृत्युना तात संगतान्।
विक्रमोऽपि रणे तेषां न तथा दृश्यते हि वै॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे भाई! मैं युद्धभूमि में एकत्र हुए कौरवों को मृत्यु का ग्रास मानता हूँ, क्योंकि युद्धभूमि में उनका पराक्रम पहले जैसा प्रबल नहीं रहा।
 
O dear brother! I consider the Kauravas gathered on the battlefield to be victims of death because their prowess on the battlefield is not as strong as it was earlier.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)