Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.114.2: हमने सदैव अपनी सेना का सम्मान किया है और वह सदैव हमारे प्रति समर्पित रही है। हमारे सैनिक युद्धकला में निपुण हैं। हमारी सेना अद्भुत दिखती है और इस सेना के लिए केवल उन्हीं लोगों का चयन किया गया है जिनका पराक्रम पहले ही देखा जा चुका है।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 7.114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नित्यं पूजितमस्माभिरभिकामं च न: सदा।
प्रौढमत्यद्भुताकारं पुरस्ताद् दृष्टविक्रमम्॥ २॥
अनुवाद
हमने सदैव अपनी सेना का सम्मान किया है और वह सदैव हमारे प्रति समर्पित रही है। हमारे सैनिक युद्धकला में निपुण हैं। हमारी सेना अद्भुत दिखती है और इस सेना के लिए केवल उन्हीं लोगों का चयन किया गया है जिनका पराक्रम पहले ही देखा जा चुका है।॥ 2॥
We have always respected our army and it has always been devoted to us. Our soldiers are adept in the art of war. Our army looks amazing and only those people have been selected for this army whose valour has already been seen.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥