श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रका विषादयुक्त वचन, संजयका धृतराष्ट्रको ही दोषी बताना, कृतवर्माका भीमसेन और शिखण्डीके साथ युद्ध तथा पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.114.1 
धृतराष्ट्र उवाच
एवं बहुगुणं सैन्यमेवं प्रविचितं बलम्।
व्यूढमेवं यथान्यायमेवं बहु च संजय॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय! मेरी सेना अनेक गुणों से संपन्न है और बड़ी संख्या में एकत्रित हुई है। वह पाण्डव सेना से भी अधिक बलवान है। उसकी युद्ध-योजना भी शास्त्रीय विधि से बनी हुई है और योद्धाओं का एक बड़ा समूह इसी प्रकार एकत्रित हुआ है॥1॥
 
Dhritarashtra said, "Sanjay! My army is endowed with many qualities and has been gathered in large numbers. It is stronger than the Pandava army. Its battle formation is also done according to the classical method and a large group of warriors has gathered in this manner.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)