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mahabharat 7.113.52-53h: हे मनुष्यों के स्वामी! इसके बाद क्रोध में भरे हुए कृतवर्मा ने पुनः महाबली सात्यकि की छाती पर दस तीखे बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.113.52-53h 
विव्याध च रणे राजन् सात्यकिं सत्यविक्रमम्॥ ५२॥
दशभिर्विशिखैस्तीक्ष्णैरभिक्रुद्ध: स्तनान्तरे।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इसके बाद क्रोध में भरे हुए कृतवर्मा ने पुनः महाबली सात्यकि की छाती पर दस तीखे बाण मारे।
 
Lord of men! After this, Kritavarman, filled with anger, again struck ten sharp arrows on the chest of the mighty Satyaki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)