vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना
»
श्लोक 50-51h
श्लोक
7.113.50-51h
स तस्य देहावरणं भित्त्वा देहं च सायक:॥ ५०॥
सपुङ्खपत्र: पृथिवीं विवेश रुधिरोक्षित:।
अनुवाद
वह बाण सात्यकि के शरीर और कवच दोनों को छेदता हुआ रक्त से लथपथ हो गया और पंख और पत्तों सहित पृथ्वी में धँस गया ॥50 1/2॥
That arrow pierced both Satyaki's body and armour, soaked in blood and sank into the earth along with feathers and leaves. 50 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×