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mahabharat 7.113.49-50h: राजन! कृतवर्मा ने अग्नि के समान तेजस्वी और वक्र गति से चलने वाले वत्सदन्त नामक बाण को धनुष पर चढ़ाकर कान तक खींचा और उससे सात्यकि की छाती में प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  7.113.49-50h 
स वत्सदन्तं संधाय जिह्मगानलसंनिभम्॥ ४९॥
आकृष्य राजन्नाकर्णाद् विव्याधोरसि सात्यकिम्।
 
 
अनुवाद
राजन! कृतवर्मा ने अग्नि के समान तेजस्वी और वक्र गति से चलने वाले वत्सदन्त नामक बाण को धनुष पर चढ़ाकर कान तक खींचा और उससे सात्यकि की छाती में प्रहार किया।
 
King! Placing the arrow named Vatsadanta, which was as bright as fire and moved in a curved manner, on the bow, Kritavarman drew it till the ear and struck Satyaki in the chest with it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)