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mahabharat 7.113.47-48h: तत्पश्चात् सात्यकि ने पुनः मुड़ी हुई गांठों वाले सोलह बाण चलाकर कृतवर्मा की छाती पर गहरे घाव कर दिये।   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.113.47-48h 
तत: पुन: षोडशभिर्नतपर्वभिराशुगै:॥ ४७॥
सात्यकि: कृतवर्माणं प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सात्यकि ने पुनः मुड़ी हुई गांठों वाले सोलह बाण चलाकर कृतवर्मा की छाती पर गहरे घाव कर दिये।
 
Thereafter Satyaki again shot sixteen arrows with bent knots and inflicted deep wounds on Kritavarma's chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)